पिछले अध्याय में जैसा की हमने पढ़ा कि उत्तर भारत में अनेक राजपूत राजा हुए जो आपस में ही लड़ते रहते थे। जिससे एक केंद्रीय सत्ता का आभाव उत्पन्न हुआ। इसी बीच भारत में अनेक मुस्लिम आक्रांता आए।
भारत पर आक्रमण करने वाला प्रथम मुस्लिम शासक मुहम्मद-बिन-कासिम (अरबी) था। उसने 712 ई. में पश्चिमोत्तर भारत पर आक्रमण किया। मुहम्मद बिन कासिम के आक्रमण के समय सिन्ध का शासक दाहिर था। इसने सिन्ध तथा मुल्तान को जीत लिया।
अलप्तगीन तुर्क सरदार ने गजनी में स्वतन्त्र तुर्क राज्य की स्थापना की। बाद में सुबुक्तगीन ने गजनी पर कब्जा कर लिया। 986 ई. में गजनी के सुबुक्तगीन ने भारत के पश्चिमोत्तर भाग पर आक्रमण किया। यह भारत पर पहला तुर्की आक्रमण था।
महमूद गजनवी सुबुक्तगीन का पुत्र था। वह 997 ई. में गजनी का शासक बना।उसने 1001 से 1027 ई. तक भारत पर 17 बार हमला किया। उसके आक्रमण का उद्देश्य अधिक धन लूटना था।
महमूद गजनवी के आक्रमण का सामना 1001 ई. में हिन्दूशाही वंश के शासक जयपाल ने किया। वैहिन्द के निकट हुए युद्ध में जयपाल पराजित हुआ एवं उसने आत्महत्या कर ली।
महमूद ने 1006 ई. में मुल्तान पर आक्रमण किया, उस समय मुल्तान का शासक अब्दुल फतह दाऊद था। 1009 ई. में महमूद गजनवी ने पेशावर पर हमला किया। इस समय पेशावर हिन्दूशाही शासक आनन्दपाल के अधीन था।
अलबरूनी, फिरदौसी, उत्बी तथा फारुखी, महमूद गजनी के दरबार में रहते थे। महमूद गजनवी ने 1025 ई. में सोमनाथ पर आक्रमण किया। महमूद गजनवी ने 1027 ई. में अन्तिम हमला जाटों के विद्रोह को दबाने के लिए किया।
महमूद गजनवी ने थानेश्वर के चक्रस्वामिन की कांस्य निर्मित आदमकद प्रतिमा को लूटकर गजनी भेजा।
खीवा निवासी अलबरूनी, तारीख-ए-सुबुक्तगीन का लेखक बैहाकी एवं उत्बी महमूद गजनवी के साथ भारत आए। 1030 ई. में महमूद गजनवी की मृत्यु हो गई।
मुहम्मद गोरी ने 1175 ई. में सबसे पहले भारत में मुल्तान पर आक्रमण किया। 1178 ई. में गुजरात के शासक भीम द्वितीय ने गोरी को पराजित किया।
1191 ई. में तराइन का प्रथम युद्ध हुआ, जिसमें मुहम्मद गोरी पृथ्वीराज चौहान से पराजित हुआ। 1192 ई. में तराइन के द्वितीय युद्ध में पृथ्वीराज चौहान की पराजय हुई। मुहम्मद गोरी उसे बन्दी बनाकर अफगानिस्तान ले गया।
1194 ई. में चंदावर के युद्ध में मुहम्मद गोरी ने कन्नौज के गहड़वाल शासक जयचन्द को पराजित किया।
मुहम्मद गोरी के सेनापति बख्तियार खिलजी ने पूर्वी भारत का अभियान किया। उसने नालन्दा तथा विक्रमशिला को नष्ट कर दिया।
इतिहासकारो में गौरी के मृत्यु के बारे में मतभेद है। कुछ इसका कारण खोखरों के साथ युद्ध के साथ युद्ध मानते है तो कुछ पृथ्वीराज चौहान का शब्द भेदी बाण।