महाजनपद काल
छठी शताब्दी ई. पू. में 16 महाजनपदों का उदय हुआ, जिसमें मगध सर्वाधिक शक्तिशाली महाजनपद था। बौद्ध ग्रन्थ अंगुत्तर निकाय में पहली बार 16 महाजनपदों की चर्चा मिलती है। इन महाजनपदों में एकमात्र अश्मक दक्षिण भारत में था।
इनमें से कुछ महाजनपद जैसे वज्जि (वैशाली), शाक्य (कपिलवस्तु), मल्ल आदि में गणतांत्रिक शासन व्यवस्था थी। जबकि अंग, काशी, मगध, कोसल आदि में राजतन्त्र था। आगे चलकर मगध सबसे शक्तिशाली साम्राज्य बना।
मगध साम्राज्य
महाजनपदों के काल में मगध ने अपनी शक्ति का विस्तार किया तथा धीरे-धीरे सम्पूर्ण उत्तर भारत को अपने आधिपत्य में ले लिया।
मगध पर शासन करने वाला पहला शासकीय वंश हर्यक वंश था। इसके बाद शिशुनाग तथा नन्द वंश ने शासन किया। नन्दों को समाप्त कर मौर्य वंश ने शासन आरम्भ किया।
हर्यक वंश
- संस्थापक: बिम्बिसार (544 ई. पू. - 493 ई.पू.)
- राजधानी: आरंभ में राजगृह (गिरिव्रज) थी, जिसे उदायिन ने बदलकर पाटलिपुत्र (गंगा और सोन नदी का संगम) कर दिया।
- पितृहंता वंश: अजातशत्रु ने अपने पिता बिम्बिसार की, और उदायिन ने अपने पिता अजातशत्रु की हत्या कर सत्ता प्राप्त की।
- विस्तार: बिम्बिसार ने वैवाहिक संबंधों (कोशल, वैशाली, मद्र) और युद्ध (अंग देश) के माध्यम से मगध का विस्तार किया।
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प्रमुख शासक:
- बिम्बिसार (544-493 ई.पू.): बुद्ध और महावीर के समकालीन।
- अजातशत्रु (493-461 ई. पू.): उसने बुद्ध की मृत्यु के बाद पहली बौद्ध संगति राजगृह में आयोजित की ।
- उदायिन (461-445 ई.पू.):पाटलिपुत्र नगर की नींव रखी।
- अंतिम शासक: नागदशक था, जिसे उसके सेनापति शिशुनाग ने हटाकर शिशुनाग वंश की स्थापना की।
शिशुनाग वंश
- स्थापना: 413 ई.पू. में शिशुनाग द्वारा।
- प्रमुख शासक: शिशुनाग, कालाशोक (काकवर्ण), नंदीवर्धन और महानंदिन।
- सैन्य और भौगोलिक विस्तार: शिशुनाग ने अवंती (उज्जैन) और वत्स को मगध साम्राज्य में शामिल किया।
- राजधानी: प्रारंभिक राजधानी गिरिव्रज (राजगृह) थी, जिसे शिशुनाग ने वैशाली स्थानांतरित किया और बाद में कालाशोक ने पाटलिपुत्र को पुनः राजधानी बनाया।
- द्वितीय बौद्ध संगीति: 383 ई.पू. में कालाशोक के शासनकाल के दौरान वैशाली में आयोजित की गई।
- अंत:345 ई.पू. के आसपास महापद्मनंद ने इस वंश का अंत कर नंद वंश की स्थापना की।
नंद वंश
- संस्थापक: महापद्म नंद (उन्हें सर्वक्षत्रान्तक अर्थात क्षत्रियों का नाश करने वाला और एकराट कहा गया है)।
- राजधानी: पाटलिपुत्र
- शासन क्षेत्र: कुरु से लेकर गोदावरी घाटी और मगध से लेकर नर्मदा तक।
- आर्थिक समृद्धि: नंद राजाओं ने एक सुदृढ़ कर प्रणाली (Taxation system) विकसित की थी, जिससे वे बहुत धनी थे।
- प्रशासन: इन्होंने केंद्रीकृत शासन पद्धति को जन्म दिया और व्यापक भूमि सुधार किए।
- सेना: सिकंदर के आक्रमण के समय नंदों के पास एक विशाल और भयानक सेना थी।
- प्रमुख शासक: महापद्म नंद और उनके आठ पुत्र, जिनमें अंतिम धनानंद था।
सिकंदर का भारत पर आक्रमण
- 326 ई.पू. में सिकन्दर ने भारत पर आक्रमण किया। वह यूनान के मकदूनिया के शासक फिलिप का पुत्र था। सिकन्दर, अरस्तू का शिष्य था।
- सिकन्दर के आक्रमण के समय पश्चिमोत्तर भारत में कई छोटे-छोटे राजतन्त्र तथा गणराज्य स्थित थे। इसमें पोरस सबसे अधिक शक्तिशाली था।
- आम्भी तक्षशिला का शासक था। उसने सिकन्दर से सन्धि कर ली।
- सिकन्दर के आक्रमण के समय मगध पर नन्दवंश के शासक धननन्द का शासन था। जनता में अलोकप्रिय होने के बावजूद उसकी सैन्य शक्ति प्रबल थी।
- झेलम तथा चिनाब के मध्यवर्ती प्रदेश के शासक पोरस के साथ सिकन्दर ने हाइडेस्पीज का युद्ध (झेलम का युद्ध) लड़ा, जिसमें घायल होने के बाद पोरस को बन्दी बना लिया गया।
- 326 ई.पू. में व्यास नदी तक पहुँचकर सिकन्दर के सैनिकों ने आगे बढ़ने से मना कर दिया। सैनिकों ने मगध की शक्ति तथा जलवायु की कष्टप्रदता के कारण यह निर्णय लिया।
- सिकन्दर को सैनिकों के निर्णय के आगे झुकना पड़ा। 323 ई.पू. में वापस यूनान जाते हुए बेबीलोन में सिकन्दर की मृत्यु हो गई।